E20 Petrol पर बढ़ी चिंता, 2023 से पहले खरीदी गई 50% कारों में माइलेज घटने का दावा

E20 Petrol : देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद इसके फायदे और नुकसान को लेकर चर्चा लगातार जारी है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण कम होगा और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी, लेकिन हाल ही में सामने आए एक सर्वे ने कई वाहन मालिकों की चिंताओं को फिर से चर्चा में ला दिया है।

LocalCircles द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, 2022 या उससे पहले खरीदी गई पेट्रोल गाड़ियों के लगभग 50 प्रतिशत मालिकों ने दावा किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है।

क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट?

E20 Petrol

यह सर्वे देश के 301 जिलों में किया गया, जिसमें 50,000 से अधिक ऐसे लोगों ने हिस्सा लिया जिनके पास 2022 या उससे पहले खरीदी गई पेट्रोल गाड़ी है।

सर्वे में शामिल लगभग आधे वाहन मालिकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उनकी गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी पहले के मुकाबले कम हो गई है।

इतना ही नहीं, करीब 29 प्रतिशत लोगों ने इंजन, फ्यूल लाइन, फ्यूल टैंक और अन्य हिस्सों में सामान्य से ज्यादा घिसावट या खराबी महसूस होने की भी बात कही है।

E20 पेट्रोल आखिर है क्या?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।

भारत सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया और 1 अप्रैल 2026 से देशभर में E20 फ्यूल को अनिवार्य कर दिया गया। हालांकि कई पेट्रोल पंपों पर यह 2025 से ही उपलब्ध था।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को फायदा मिलेगा।

सरकार का क्या कहना है?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहले भी इन चिंताओं पर जवाब दिया था।

मंत्रालय के अनुसार वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग स्टाइल, टायर प्रेशर, इंजन की स्थिति, एयर फिल्टर की सफाई और गाड़ी के रखरखाव जैसे कई कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं।

सरकार का कहना है कि E20 फ्यूल से ड्राइविंग क्वालिटी और एक्सीलरेशन बेहतर हो सकते हैं तथा कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

मंत्रालय ने यह भी कहा था कि अधिकांश आधुनिक वाहनों में E20 से कोई बड़ी समस्या नहीं होती। हालांकि कुछ पुराने वाहनों में रबर पार्ट्स और गैस्केट अपेक्षाकृत जल्दी बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

Nitin Gadkari ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी E20 को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा था कि दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां E20 पेट्रोल के कारण वाहनों में बड़ी समस्या सामने आई हो।

हालांकि वास्तविक उपयोग करने वाले कुछ वाहन मालिकों का अनुभव इससे अलग दिखाई देता है।

लोगों को क्यों लग रहा है माइलेज कम हुआ?

कई वाहन मालिकों का मानना है कि उनकी गाड़ियों में माइलेज में गिरावट सरकार द्वारा बताए गए 1 से 6 प्रतिशत के अनुमान से कहीं ज्यादा है।

खासकर पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की ड्राइविंग में पहले की तुलना में ज्यादा ईंधन खर्च करना पड़ रहा है।

हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक सर्वे आधारित रिपोर्ट है और सभी वाहनों में एक जैसी स्थिति नहीं हो सकती।

नई गाड़ियों पर कितना असर?

2023 के बाद लॉन्च हुई ज्यादातर नई कारें E20 फ्यूल के अनुरूप तैयार की गई हैं।

Maruti Suzuki, Hyundai, Tata Motors, Mahindra, Honda और Toyota जैसी कंपनियां पहले ही E20 Compatible इंजन पेश कर चुकी हैं। इसलिए नई गाड़ियों में इस ईंधन को लेकर चिंता अपेक्षाकृत कम है।

निष्कर्ष

E20 पेट्रोल को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। एक तरफ सरकार इसे पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ पुराने वाहन मालिक माइलेज में कमी और अतिरिक्त घिसावट की शिकायत कर रहे हैं।

आने वाले समय में अधिक डेटा और लंबी अवधि के उपयोग के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि E20 पेट्रोल का वास्तविक असर पुराने वाहनों पर कितना पड़ता है।

Disclaimer

यह लेख LocalCircles सर्वे और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। वास्तविक अनुभव वाहन, उसकी स्थिति, रखरखाव और उपयोग के तरीके के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

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