Honda भारत में EV कारोबार बढ़ाने से पहले पुराने इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार का अध्ययन कर रही है

Honda भारत में EV कारोबार बढ़ाने से पहले पुराने इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार का अध्ययन कर रही है : Honda Motorcycle & Scooter India (HMSI) भारत में अपना इलेक्ट्रिक कारोबार कितनी तेजी से बढ़ाए, यह तय करने से पहले सेकंड-हैंड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार को करीब से देख रही है।

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कंपनी यह समझने की कोशिश कर रही है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर समय के साथ अपनी कीमत कैसे बनाए रखते हैं, बैटरी हेल्थ का रीसेल प्राइस पर क्या असर पड़ता है, और पहले कुछ सालों के बाद गाड़ी हाथ बदलने पर ग्राहक कैसे रिस्पॉन्ड करते हैं।

HMSI के प्रेसिडेंट, मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO Tsutsumu Otani को उम्मीद है कि अगले तीन साल में कंपनी को बाजार की साफ तस्वीर मिल जाएगी। इन नतीजों का असर Honda की आगे की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रणनीति पर पड़ सकता है, जो अब तक काफी सतर्क रही है।

सबसे बड़ी चिंता: रेसिडुअल वैल्यू

Honda की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की रेसिडुअल वैल्यू है। सामान्य पेट्रोल स्कूटर के उलट, EV में बैटरी डिग्रेडेशन, उसे बदलने का खर्च और गाड़ी की बची हुई उम्र जैसे सवाल जुड़ जाते हैं। भारतीय खरीदार अक्सर अपनी बाइक और स्कूटर 10 साल से ज्यादा रखते हैं। Honda मानती है कि यह समझना कि बैटरी पुरानी होने पर ग्राहक स्कूटर चलाते रहते हैं, बैटरी बदलवाते हैं या दूसरी गाड़ी ले लेते हैं—यह इस सेगमेंट की लंबे समय की ग्रोथ के लिए अहम है।

बैटरी हेल्थ मापने का तरीका

कंपनी बैटरी की हालत भरोसेमंद तरीके से मापने के तरीके पर भी काम कर रही है। Otani ने स्मार्टफोन से तुलना की, जिनमें बैटरी-हेल्थ इंडिकेटर मिलते हैं जो यूजर को डिवाइस की स्थिति बताते हैं। ऐसा ही तरीका इस्तेमाल किया जाए तो पुरानी EV खरीदने वाले ज्यादा सही फैसला ले सकेंगे। बैटरी हेल्थ का पारदर्शी आकलन रीसेल वैल्यू को भी ज्यादा अनुमानित बना सकता है, जिससे प्री-ओन्ड बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदना और बेचना आसान होगा।

निजी और कमर्शियल ग्राहकों की अलग जरूरतें

Honda निजी खरीदारों और कमर्शियल यूजर्स की जरूरतों में फर्क देखती है। डिलीवरी ऑपरेटर्स और दूसरे बिजनेस कस्टमर्स के लिए बैटरी स्वैपिंग डाउनटाइम कम कर सकती है, क्योंकि राइडर को बैटरी चार्ज होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वहीं निजी खरीदारों को बैटरी सब्सक्रिप्शन मॉडल से फायदा हो सकता है। ऐसी व्यवस्था में बैटरी सर्विस प्रोवाइडर की संपत्ति रहती है, जिससे खरीदार पर बैटरी बदलने का खर्च और डेप्रिसिएशन कम पड़ता है। 

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EV से पीछे नहीं हट रही Honda

इस अध्ययन का मतलब यह नहीं कि Honda इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से दूर हो रही है। कंपनी बड़ा कदम उठाने से पहले ग्राहकों की उम्मीदें और ओनरशिप कॉस्ट समझना चाहती है। Honda ने भारत में Activa e:, QC1 और QC3 पेश की हैं, लेकिन मौजूदा खिलाड़ियों के मुकाबले उसकी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मौजूदगी अभी छोटी है। QC3 सितंबर 2026 में 1.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) पर लॉन्च हुई थी और शुरुआती रोलआउट पांच शहरों में है। Honda ने यह भी संकेत दिया है कि और इलेक्ट्रिक प्रोडक्ट्स पर विचार चल रहा है, हालांकि उनके नाम या लॉन्च टाइमलाइन सामने नहीं आई हैं।

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