भारत में बढ़ सकता है Hybrid और PHEV का दायरा, पेट्रोल की हिस्सेदारी घटी : भारतीय कार मार्केट अब कई ईंधन और ड्राइवट्रेन विकल्पों में बंट रहा है, जिससे हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) के लिए जगह बन रही है। सितंबर 2026 में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में पेट्रोल की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही, जो पिछले साल इसी महीने के 47 प्रतिशत से कम है। वहीं CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने मिलकर इसी महीने 41 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जो एक साल पहले 35 प्रतिशत था। यह जानकारी FADA के डेटा से है।

Stellantis का प्लान
Stellantis ने भारत के लिए नया प्रोडक्ट प्लान पहले ही बता दिया है, जिसमें ICE, हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक गाड़ियां कई सेगमेंट में शामिल हैं। सात नए मॉडल और पांच अपग्रेड का प्लान है और यह प्रोडक्ट लहर 2027 की दूसरी तिमाही से शुरू होगी। इस रोडमैप में हाइब्रिड को शामिल करना बताता है कि इलेक्ट्रिफाइड कंबशन पावरट्रेन कंपनी के भविष्य का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
Renault का अलग रास्ता, एक ही मंजिल
Renault भी अलग शुरुआती बिंदु से इसी नतीजे पर पहुंची है। भारत में फ्रेंच ब्रांड की सफलता गाड़ियों की संख्या जितनी ही इंजन के विकल्पों पर भी निर्भर है। करीब एक साल पहले Kwid, Kiger और Triber सिर्फ स्थानीय बाजार का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा कवर करते थे। अब Renault अगले दो सालों में अपने व्हीकल और पावरट्रेन पोर्टफोलियो को करीब 80 प्रतिशत तक पहुंचाना चाहती है, जिसके लिए सिर्फ पेट्रोल विकल्प काफी नहीं हैं।

Toyota का उदाहरण
Toyota इस बात का सबूत देती है कि इलेक्ट्रिफाइड कंबशन टेक्नोलॉजी का भारत में पहले से बड़ा पैमाना है। कंपनी ने तीन लाख से ज्यादा हाइब्रिड गाड़ियां बेची हैं, और यह टेक्नोलॉजी उसके प्रोडक्ट प्लानिंग में CNG, इलेक्ट्रिक और सामान्य कंबशन ऑप्शन के साथ मौजूद है।
CNG का बढ़ता दायरा
CNG भी इस समीकरण का बड़ा हिस्सा है, क्योंकि ज्यादातर मेनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरर्स इस पर उतर चुके हैं। Maruti Suzuki, Tata और Hyundai पहले से अपना CNG पोर्टफोलियो बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। Hyundai का नया पुणे प्लांट आगे चलकर हाइब्रिड गाड़ियों को जन्म देगा।
Mahindra ने हाल ही में XUV 3XO ZNG के जरिए फैक्ट्री-फिटेड CNG की रेस में एंट्री की है। MG और Kia ने Hector Tomahawk PHEV और लोकली बने Sorento के जरिए अपने इरादे साफ कर दिए हैं। पिछले एक-दो साल में किफायती SUV सेगमेंट में कई नई CNG लॉन्च हुई हैं। Volkswagen Group India भी उत्सर्जन मानकों के सख्त होने के बीच CNG और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर विचार कर रही है।
आगे क्या होगा?
ईंधन और ड्राइवट्रेन विकल्पों का बढ़ता दायरा बताता है कि आगे प्रोडक्ट प्लानिंग पेट्रोल या डीजल के किसी एक विकल्प पर नहीं, बल्कि सेगमेंट, इलाके और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निर्भर करेगी। हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड को इस बंटे हुए मार्केट का फायदा मिल सकता है, क्योंकि ये ICE पावरट्रेन और BEVs के बीच की जगह भरते हैं।