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Hyundai Ioniq 3 में ड्राइवर डिस्प्ले अब स्टैंडर्ड नहीं, कीमत 24,000 रुपये बढ़ी

Hyundai Ioniq 3

Hyundai Ioniq 3

Hyundai Ioniq 3: चौबीस हज़ार रुपये। यानी अमेरिका में महज़ 255 डॉलर का विकल्प। लेकिन भारत में अगर यही फीचर हटाया गया, तो आपकी गाड़ी की ईएमआई पर हर महीने 500-600 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। Hyundai ने अपनी Ioniq 3 और Elantra के बेस वेरिएंट से ड्राइवर डिस्प्ले हटाने का फैसला किया है, और इसे वापस पाने के लिए अलग से पैसे चुकाने होंगे। सवाल यह नहीं है कि यह फीचर कितने का है, सवाल यह है कि क्या Hyundai भारत में भी यही रास्ता अपनाएगी? क्योंकि जिस देश में लोग सेकेंड-हैंड कार खरीदते समय डिजिटल डिस्प्ले की उम्मीद करते हैं, वहां बेस वेरिएंट से यह सुविधा गायब करना आत्मघाती साबित हो सकता है।

Hyundai का यह कदम सीधे तौर पर लागत कम करने की रणनीति है। अमेरिका में Pleos Slim Driver Display नाम का यह 12.3 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर अब बेस ट्रिम्स में स्टैंडर्ड नहीं रहा। कंपनी का कहना है कि इसे 255 डॉलर यानी करीब 24,000 रुपये के विकल्प के रूप में खरीदा जा सकता है। लेकिन असली चिंता यह है कि कुछ बेस वेरिएंट्स पर यह विकल्प उपलब्ध ही नहीं है। यानी आपको मजबूरन अगले ट्रिम पर जाना पड़ेगा, जिसका खर्च सिर्फ 24,000 नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा होगा। भारतीय बाजार में जहां Elantra एक प्रीमियम सेडान है, वहां स्टैंडर्ड फीचर हटाना ब्रांड इमेज को धक्का पहुंचा सकता है। खासकर तब जब प्रतिद्वंद्वी कंपनियां अपने बेस मॉडल में भी डिजिटल डिस्प्ले दे रही हैं।

भारतीय खरीदार की जेब पर सीधा वार

मान लीजिए कि Hyundai India भी यही नीति अपनाती है। तो आपकी गाड़ी की ऑन-रोड कीमत में करीब 24,000 रुपये का इजाफा होगा, बशर्ते आप विकल्प चुनें। पांच साल के लोन पर इसका मासिक बोझ 500-600 रुपये बैठता है। यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन जब आप रिसेल वैल्यू की बात करते हैं, तो मुश्किल खड़ी हो जाती है। भारत में इस्तेमाल की गई कार खरीदने वाला ग्राहक आज डिजिटल डिस्प्ले को बेसिक सुविधा मानता है। अगर आपकी कार में एनालॉग डायल्स होंगे, तो सेकेंड-हैंड बाजार में उसकी कीमत सीधे गिर जाएगी। यही नहीं, Kia EV3 और MG 4 EV जैसे प्रतिद्वंद्वी अपने एंट्री-लेवल मॉडल में भी फुल डिजिटल कॉकपिट दे रहे हैं। ऐसे में Hyundai की यह कंजूसी उसे प्रीमियम इलेक्ट्रिक सेगमेंट में पीछे धकेल सकती है।

डीकंटेंटिंग का खतरनाक ट्रेंड

यह कोई पहला मामला नहीं है जब Hyundai ने फीचर घटाए हों। पहले भी कंपनी ने कई मॉडलों में स्टैंडर्ड सेफ्टी किट या इंफोटेनमेंट स्क्रीन को हटाकर उन्हें पेड ऑप्शन बनाया है। लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर है क्योंकि ड्राइवर डिस्प्ले सिर्फ एक लग्जरी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। स्पीड, बैटरी प्रतिशत, रेंज और नेविगेशन की जानकारी के लिए आपको हर पल इसकी जरूरत पड़ती है। एनालॉग डायल्स पर यह सब देखना संभव नहीं है। इसका सीधा असर आपके ड्राइविंग अनुभव पर पड़ता है। हाईवे पर 120 की रफ्तार से दौड़ते समय आपको अपनी आंखें सड़क से हटाकर छोटे डायल पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा, जो सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं है।

किसे खरीदनी चाहिए और किसे दूरी बनानी चाहिए

अगर आप तकनीक के दीवाने हैं और हर नई सुविधा चाहते हैं, तो इस समय Hyundai की बेस ट्रिम से दूरी बनाना ही बेहतर है। आपको मजबूरन टॉप वेरिएंट पर जाना पड़ेगा, जहां कीमत काफी बढ़ जाती है। वहीं अगर आपका बजट सीमित है और आप सिर्फ एक भरोसेमंद गाड़ी चाहते हैं, जो आपको बिंदु A से बिंदु B तक पहुंचाए, तो एनालॉग डायल्स से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन याद रखिए, भारतीय बाजार में रिसेल वैल्यू का खेल बहुत बड़ा है। जिस दिन आप यह कार बेचने जाएंगे, उस दिन खरीदार डिजिटल डिस्प्ले की कमी का हवाला देकर मोलभाव करेगा। Hyundai को यह समझना होगा कि भारत में फीचर हटाने की कीमत सिर्फ 24,000 रुपये नहीं, बल्कि ब्रांड की विश्वसनीयता है। यह गाड़ी उन्हें खरीदनी चाहिए जो कीमत की परवाह किए बिना टॉप वेरिएंट ले सकते हैं, और जो बजट में हैं उन्हें शोरूम से दूरी बना लेनी चाहिए।

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