अब या कभी नहीं! Q4 FY2026 में फंसी भारत की कार इंडस्ट्री की 8% ग्रोथ की उम्मीद : नया साल शुरू होते ही भारत की कार इंडस्ट्री एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ी है। जनवरी से मार्च 2026 का समय ऐसा है, जो तय करेगा कि FY2026 में पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री 8% की ग्रोथ हासिल कर पाएगी या नहीं। आम खरीदार की भाषा में कहें तो आने वाले तीन महीने यह तय करेंगे कि कार कंपनियों का साल यादगार बनेगा या बस औसत बनकर रह जाएगा। इस वक्त इंडस्ट्री की नज़र करीब 47.3 लाख कारों की रिकॉर्ड बिक्री पर टिकी हुई है, लेकिन रास्ता इतना आसान भी नहीं दिख रहा।
Q4 क्यों है इतना निर्णायक?
हर साल जनवरी–मार्च का क्वार्टर कार बिक्री के लिए बेहद अहम माना जाता है। लोग नई शुरुआत के लिए नई कार खरीदते हैं, कंपनियां ऑफर्स देती हैं और डीलरशिप पर हलचल तेज़ हो जाती है। लेकिन इस बार माहौल थोड़ा बदला हुआ है। त्योहारों के बाद दिसंबर में बिक्री की रफ्तार सुस्त पड़ी और ग्रोथ सिर्फ करीब 3% तक सिमट गई। यह गिरावट इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी की तरह है कि अगर Q4 में रफ्तार नहीं आई, तो FY2026 का 8% ग्रोथ टारगेट मुश्किल हो सकता है।
पैसों की तंगी और लोन का असर
एक बड़ी वजह है आम परिवार की जेब। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बचत घटकर GDP के करीब 5% तक आ गई है। इसका सीधा असर कार जैसी बड़ी खरीद पर पड़ता है। भले ही ब्याज दरों में थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन बैंक ऑटो लोन देने में अब भी सतर्क हैं। इसी कारण कार कंपनियां फाइनेंस स्कीम, सबवेंशन ऑफर और NBFC के जरिए ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि कार इंडस्ट्री ग्रोथ FY2026 का लक्ष्य बना रहे।
GST 2.0 का असर अब हो रहा है हल्का
सितंबर 2025 में आए GST 2.0 बदलावों ने कुछ समय के लिए बाजार में जोश भर दिया था। कीमतों में राहत से खरीदार शोरूम पहुंचे, लेकिन अब उसका असर धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। इंडस्ट्री के लिए बड़ा सवाल यही है कि क्या वह उछाल स्थायी डिमांड में बदलेगा या सिर्फ कुछ महीनों की बिक्री आगे खिसक गई थी।
कंपनियों की रणनीति और बढ़ती कीमतें
बड़े ब्रांड पहले ही सतर्क हो चुके हैं। Maruti Suzuki और Hyundai ने जनवरी से कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। डीलर स्तर पर भी इन्वेंट्री को 30–35 दिन तक सीमित रखा जा रहा है, ताकि Q4 में तेज़ क्लियरेंस हो सके। वहीं Mahindra & Mahindra और Tata Motors जैसे ब्रांड SUV और EV की मजबूत रेंज के दम पर बढ़त बनाए हुए हैं।
शहरों से ज़्यादा उम्मीद गांवों से
जहां बड़े शहरों में महंगी कारों को लेकर थोड़ी थकान दिख रही है, वहीं ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों से उम्मीदें बढ़ रही हैं। अच्छी मॉनसून, मजबूत फसल और रिप्लेसमेंट डिमांड से एंट्री-लेवल कार और कॉम्पैक्ट SUV की बिक्री को सहारा मिल सकता है। यही फैक्टर Q4 को इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर बना सकता है।
नज़र अब सिर्फ एक बात पर
आख़िरकार, आने वाले तीन महीने यह तय करेंगे कि India car industry FY2026 में इतिहास बनाएगी या नहीं। ऑफर्स, फाइनेंस स्कीम और नए लॉन्च मिलकर अगर ग्राहकों का भरोसा जीत पाए, तो 8% ग्रोथ का सपना हकीकत बन सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध उद्योग रिपोर्ट्स और मीडिया जानकारियों पर आधारित है। बिक्री आंकड़े, ग्रोथ अनुमान और नीतियां समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी खरीद निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी और डीलर से पुष्टि ज़रूर करें।

