ब्रिटेन की सड़कों पर दौड़ेंगी भारतीय EVs! Tata, Mahindra और Maruti के लिए खुला बड़ा मौका

भारत में बनी इलेक्ट्रिक कारें अब ब्रिटेन की सड़कों पर दिख सकती हैं :  एक समय था जब भारत को सिर्फ दुनिया का बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।

आज भारत न सिर्फ कारें बना रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब भी बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और तेज हो सकता है।

इसकी सबसे बड़ी वजह बन सकता है भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ नया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी India-UK FTA।

इस समझौते से Tata Motors, Mahindra और Maruti Suzuki जैसी कंपनियों को भारत में बनी इलेक्ट्रिक कारें ब्रिटेन भेजने का बड़ा अवसर मिल सकता है।

क्या है India-UK FTA?

EVs

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ यह व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इस समझौते के तहत भविष्य में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को विशेष छूट मिलेगी।

ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े नियम समझौते के छठे साल से लागू होंगे।

शुरुआत में हर साल 17,600 वाहनों के निर्यात पर ड्यूटी में छूट मिलेगी।

इसके बाद यह संख्या धीरे-धीरे बढ़कर 15वें साल तक 88,000 वाहनों प्रति वर्ष हो जाएगी।

किन गाड़ियों को मिलेगा फायदा?

यह छूट सिर्फ उन यात्री वाहनों पर लागू होगी, जिनकी कीमत 80,000 पाउंड से कम होगी।

इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

इनमें शुरुआती दो श्रेणियों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी।

यही वजह है कि भारत में बनने वाली किफायती और मिड-रेंज EVs के लिए ब्रिटेन एक बड़ा बाजार बन सकता है।

Tata, Mahindra और Maruti को कैसे होगा फायदा?

Tata Motors

Tata Motors के पास भारत में सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो मौजूद है।

कंपनी पहले से ही Nexon EV, Punch EV, Curvv EV और Harrier EV जैसे मॉडल बेच रही है।

नई नीति Tata को ब्रिटेन जैसे बड़े बाजार में अपनी EVs भेजने का अवसर दे सकती है।

Mahindra

Mahindra फिलहाल अपने ग्लोबल विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है।

कंपनी BE और XEV सीरीज की इलेक्ट्रिक SUVs के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।

ब्रिटेन उसके लिए एक अहम बाजार साबित हो सकता है।

Maruti Suzuki

Maruti Suzuki की e Vitara पहले ही यूरोप में मजबूत शुरुआत कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी लॉन्च के नौ महीनों के भीतर करीब 36,000 यूनिट्स निर्यात कर चुकी है।

ब्रिटेन को भी कंपनी अपने प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल कर सकती है।

15 जुलाई से लागू होगा समझौता

India-UK FTA आधिकारिक तौर पर 15 जुलाई से लागू होगा।

हालांकि, ड्यूटी-फ्री वाहन कोटा तुरंत शुरू नहीं होगा।

ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी छूट छठे साल से लागू होगी।

इस दौरान कंपनियों को उत्पाद तैयार करने, होमोलोगेशन, डीलर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और आफ्टर-सेल्स सर्विस की तैयारी करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

क्यों अहम है ब्रिटेन का बाजार?

ब्रिटेन भारतीय वाहन निर्माताओं के लिए कई मायनों में खास है।

इन कारणों से भारतीय कंपनियों के लिए वहां विस्तार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

भारत अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता।

अगर आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक कारों को सफलतापूर्वक ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों में पहुंचाने में कामयाब होती हैं, तो यह सिर्फ ऑटो इंडस्ट्री के लिए ही नहीं, बल्कि “मेक इन इंडिया” अभियान के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी।

शायद आने वाले समय में लंदन की सड़कों पर दौड़ती हुई Tata, Mahindra और Maruti की इलेक्ट्रिक कारें भारत की नई पहचान बन जाएं।

Exit mobile version