जब आम कारें रिकॉर्ड बना रहीं, तब Luxury Cars क्यों फेल रहीं? 2025 की पूरी कहानी : भारत में साल 2025 कार इंडस्ट्री के लिए रिकॉर्ड बनाने वाला रहा है। हर गली-मोहल्ले में नई गाड़ियां दिख रही हैं, शोरूम्स में भीड़ है और पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री नए शिखर छू रही है। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच एक ऐसा सेगमेंट भी है, जहां रफ्तार थमी हुई नजर आती है। हम बात कर रहे हैं लग्ज़री कार मार्केट की। Luxury Car Sales India 2025 के आंकड़े बताते हैं कि जहां आम कारों की बिक्री बूम पर है, वहीं 50 लाख रुपये से ऊपर की लग्ज़री कारों की ग्रोथ बेहद सीमित रही है।
2025 में लग्ज़री कार बिक्री क्यों रही सुस्त
2025 के अंत तक भारत में लग्ज़री कारों की कुल बिक्री करीब 52,000 यूनिट्स पर सिमटने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ लगभग 1.6 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली है। यह आंकड़ा तब और चौंकाता है जब हम देखते हैं कि पूरा पैसेंजर व्हीकल मार्केट 10 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ के साथ करीब 46 लाख यूनिट्स तक पहुंचने वाला है। Luxury car market slowdown India साफ दिखाता है कि महंगी कारें फिलहाल ग्राहकों की प्राथमिकता में पीछे चली गई हैं।
पैसा होने के बावजूद क्यों रुके खरीदार
दिलचस्प बात यह है कि भारत में हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी लग्ज़री कारें कुल कार बिक्री का सिर्फ 1 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा हिस्सा ही बनाती हैं। इसकी बड़ी वजह है आर्थिक अनिश्चितता। शेयर बाजार की उठापटक, वैश्विक तनाव और कमजोर होता रुपया अमीर खरीदारों को भी सोचने पर मजबूर कर रहा है। चूंकि ज्यादातर लग्ज़री कारें इम्पोर्ट पर निर्भर होती हैं, इसलिए बढ़ती लागत ने कीमतों को और संवेदनशील बना दिया है। यही कारण है कि luxury car sales India में ठहराव देखने को मिला।
महामारी के बाद का उछाल अब हुआ सामान्य
ऑटो इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि कोविड के बाद लग्ज़री सेगमेंट में जो तेज़ उछाल आया था, उसका सामान्य होना तय था। उस दौर में पेंट-अप डिमांड ने बिक्री को ऊपर धकेला, लेकिन 2025 में वही मांग स्थिर हो गई। इसे कमजोरी नहीं, बल्कि कंसॉलिडेशन का दौर माना जा रहा है। यही वजह है कि ब्रांड्स इसे अलार्म की तरह नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक चरण के रूप में देख रहे हैं।
GST कटौती से बनी नई उम्मीद
सितंबर 2025 में सरकार द्वारा लग्ज़री कारों पर GST को घटाकर 40 प्रतिशत करना एक अहम कदम माना जा रहा है। पहले यह टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता था। भले ही इस फैसले से तुरंत बिक्री में उछाल नहीं आया हो, लेकिन इससे लंबे समय में भरोसा बढ़ा है। ऑटोमेकर मानते हैं कि टैक्स क्लैरिटी से आने वाले क्वार्टर्स में Luxury car sales recovery India की नींव मजबूत होगी।
Mercedes, BMW और Audi का दबदबा कायम
धीमी बिक्री के बावजूद टॉप लेवल पर मुकाबला काफी सीमित है। Mercedes-Benz, BMW और Audi मिलकर भारत के करीब 85 प्रतिशत लग्ज़री कार बाजार पर कब्जा किए हुए हैं। Mercedes-Benz टैक्स सुधारों को राहत मान रही है, BMW को GST कटौती के बाद बढ़ती पूछताछ और ऑर्डर बैकलॉग से उम्मीद दिख रही है, जबकि Audi थोड़ा सतर्क लेकिन आशावादी रुख अपनाए हुए है।
2026 में वापसी की उम्मीद क्यों
इंडस्ट्री को भरोसा है कि 2026 में तस्वीर बदल सकती है। अगर करेंसी स्थिर रहती है, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार जारी रहता है और खरीदारों का भरोसा लौटता है, तो लग्ज़री कार सेगमेंट फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। खासकर तब, जब मास मार्केट पहले ही मजबूती दिखा चुका है।
Disclaimer: यह लेख इंडस्ट्री रिपोर्ट्स, मीडिया इनपुट्स और अनुमानित आंकड़ों पर आधारित है। वास्तविक बिक्री और ग्रोथ ब्रांड, नीति बदलाव और बाजार स्थितियों के अनुसार बदल सकती है। खरीद से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

