BMW-Audi होंगी ₹25 लाख तक सस्ती! Luxury Cars India में बड़ा धमाका : अगर आपने कभी BMW, Audi या Mercedes-Benz खरीदने का सपना देखा है, लेकिन कीमत देखकर मन बदल लिया, तो अब हालात बदलने वाले हैं। भारत में लग्ज़री कार बाजार एक बड़े बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है। India–European Union Free Trade Agreement को लेकर जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे बताते हैं कि आने वाले समय में यूरोप से आयात होने वाली लग्ज़री कारें ₹25 लाख या उससे भी ज्यादा सस्ती हो सकती हैं।
अब तक यूरोप से पूरी तरह बनी हुई (CBU) कारें भारत लाना बेहद महंगा सौदा रहा है। भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी ने इन्हें आम खरीदार की पहुंच से बहुत दूर रखा। लेकिन अगर नया समझौता लागू होता है, तो यह तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती, यहीं से बदलेगा खेल
दशकों से यूरोपियन ICE कारों पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 100% से लेकर 110% तक रही है। इसका मतलब यह था कि जो कार यूरोप में 45,000 से 50,000 यूरो की मिलती थी, वह भारत पहुंचते-पहुंचते लगभग दोगुनी कीमत की हो जाती थी।
नए प्रस्तावित समझौते के तहत 15,000 यूरो से ज्यादा कीमत वाली यूरोपियन ICE कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को पहले चरण में घटाकर 40% किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए सालाना करीब 2 लाख यूनिट्स की सीमा तय की जाएगी। आगे चलकर यह ड्यूटी और कम होकर लगभग 10% तक पहुंच सकती है।
यहीं से Luxury cars price drop in India जैसी चर्चा को असली ताकत मिलती है।
कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, समझिए आसान भाषा में
अगर ड्यूटी 110% से सीधे 40% पर आ जाती है, तो टैक्स का बोझ काफी हल्का हो जाएगा। GST और डीलर मार्जिन जोड़ने के बाद भी कई लग्ज़री कारों की एक्स-शोरूम कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा सकती है।
इसका सीधा फायदा BMW, Mercedes-Benz, Audi, Volkswagen और Porsche जैसी कंपनियों को मिलेगा। जो कारें आज 1.2 से 1.5 करोड़ रुपये में आती हैं, वही भविष्य में कहीं ज्यादा आकर्षक कीमत पर मिल सकती हैं।
इलेक्ट्रिक कारों को क्यों नहीं मिलेगा तुरंत फायदा 
हालांकि यह राहत तुरंत इलेक्ट्रिक कारों पर लागू नहीं होगी। यूरोप से आने वाली EVs को लगभग पांच साल तक इस ड्यूटी कट से बाहर रखा जाएगा। माना जा रहा है कि यह कदम भारत में घरेलू EV कंपनियों जैसे Tata Motors और Mahindra & Mahindra को सुरक्षा देने के लिए उठाया गया है।
पांच साल बाद EVs के लिए भी वही चरणबद्ध ड्यूटी कट लागू हो सकता है, जिससे प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों का बाजार भी तेजी से बदल सकता है।
भारतीय लग्ज़री कार मार्केट पर क्या होगा असर
भारत का पैसेंजर व्हीकल मार्केट अब सालाना 44 लाख यूनिट्स से ज्यादा का हो चुका है, लेकिन यूरोपियन लग्ज़री ब्रांड्स की हिस्सेदारी अब भी बहुत सीमित है। इसकी सबसे बड़ी वजह ऊंची कीमतें रही हैं।
नया टैरिफ स्ट्रक्चर कंपनियों को सीमित रिस्क के साथ बाजार परखने का मौका देगा। पहले इंपोर्ट के जरिए डिमांड समझी जाएगी, फिर लोकल असेंबली या मैन्युफैक्चरिंग पर फैसला लिया जा सकता है।
अगर यह समझौता तय रूप में लागू होता है, तो यह भारत में लग्ज़री कार खरीदने की सोच को हमेशा के लिए बदल सकता है।
Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और प्रस्तावित व्यापार समझौते से जुड़ी जानकारियों पर आधारित है। अंतिम नियम, ड्यूटी स्ट्रक्चर और कीमतें आधिकारिक घोषणा के बाद बदल सकती हैं। किसी भी खरीद से पहले कंपनी की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।