भारत में कॉम्पैक्ट एसयूवी से ज्यादा बिकने लगीं मिडसाइज एसयूवी, जानें क्यों बदल रही है ग्राहकों की पसंद

भारत में कॉम्पैक्ट एसयूवी से ज्यादा बिकने लगीं मिडसाइज एसयूवी, आखिर क्यों बदल रही है ग्राहकों की पसंद : एक समय था जब चार मीटर से छोटी कॉम्पैक्ट एसयूवी भारतीय ग्राहकों की पहली पसंद बनती जा रही थीं। ब्रेज़ा, नेक्सन, वेन्यू और सोनेट जैसी गाड़ियों ने हैचबैक और सेडान खरीदने वाले ग्राहकों को अपनी तरफ खींच लिया था। लेकिन अब बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राहक धीरे-धीरे छोटी एसयूवी से आगे बढ़कर बड़ी और ज्यादा जगह वाली मिडसाइज एसयूवी की तरफ जा रहे हैं।

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बिक्री के मामले में मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट अब कॉम्पैक्ट एसयूवी से आगे निकल गया है। इसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। ज्यादा जगह, बेहतर फीचर्स, मजबूत सेफ्टी और ग्राहकों की बढ़ती खरीद क्षमता जैसे कई कारण इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

मिडसाइज एसयूवी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार में मिडसाइज एसयूवी की हिस्सेदारी बढ़कर 18.2 प्रतिशत पहुंच गई।

एक साल पहले इसी अवधि में यह हिस्सेदारी 15 प्रतिशत थी, जबकि दो साल पहले यह सिर्फ 12.4 प्रतिशत थी। यानी दो साल के भीतर इस सेगमेंट की बाजार हिस्सेदारी में करीब 5.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं दूसरी तरफ कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट की हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिली है।

Midsize SUVs

अवधि मिडसाइज एसयूवी की हिस्सेदारी कॉम्पैक्ट एसयूवी की हिस्सेदारी
पहली तिमाही, वित्त वर्ष 2025 12.4 प्रतिशत 15.3 प्रतिशत
पहली तिमाही, वित्त वर्ष 2026 15.0 प्रतिशत 16.2 प्रतिशत
पहली तिमाही, वित्त वर्ष 2027 18.2 प्रतिशत 14.6 प्रतिशत

कॉम्पैक्ट एसयूवी की हिस्सेदारी पहली तिमाही, वित्त वर्ष 2026 में 16.2 प्रतिशत तक पहुंची थी, लेकिन अब यह घटकर 14.6 प्रतिशत रह गई है।

आखिर मिडसाइज एसयूवी की तरफ क्यों जा रहे हैं ग्राहक?

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण है कि अब लोग कार खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं देख रहे हैं। अगर बजट थोड़ा बढ़ाकर ज्यादा जगह, बेहतर आराम और अधिक फीचर्स वाली गाड़ी मिल रही है, तो कई ग्राहक बड़ा मॉडल खरीदना पसंद कर रहे हैं।

मिडसाइज एसयूवी में आमतौर पर कॉम्पैक्ट एसयूवी के मुकाबले:

  • ज्यादा बड़ा और आरामदायक केबिन मिलता है
  • पीछे बैठने वालों के लिए बेहतर जगह होती है
  • बूट स्पेस ज्यादा मिलता है
  • लंबी यात्राओं में ज्यादा आराम मिलता है
  • ज्यादा फीचर्स और आधुनिक तकनीक मिलती है
  • सेफ्टी उपकरणों की संख्या भी ज्यादा हो सकती है

आजकल परिवार के साथ लंबी यात्राएं और सड़क यात्राएं पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ी हैं। ऐसे में ग्राहक ऐसी गाड़ी चाहते हैं जिसमें चार या पांच लोग आराम से बैठ सकें और सामान रखने के लिए भी पर्याप्त जगह हो।

ग्राहक अब थोड़ा ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं

भारतीय कार बाजार में धीरे-धीरे एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पहले जहां ग्राहक बजट के हिसाब से सबसे सस्ती गाड़ी चुनते थे, वहीं अब कई लोग थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करके बड़ा और बेहतर मॉडल लेना पसंद कर रहे हैं।

बढ़ती आय और कारों को लंबे समय तक इस्तेमाल करने की सोच भी इसका एक कारण है। अगर कोई व्यक्ति गाड़ी को सात या आठ साल तक चलाने की योजना बना रहा है, तो वह शुरुआत में थोड़ा ज्यादा खर्च करके ज्यादा आरामदायक और सुविधाओं से भरी एसयूवी लेना बेहतर समझ सकता है।

यही वजह है कि हुंडई, मारुति सुजुकी, महिंद्रा, टाटा, किया और टोयोटा जैसी कंपनियां इस सेगमेंट में लगातार नए विकल्प दे रही हैं।

इन गाड़ियों ने बढ़ाई सेगमेंट की लोकप्रियता

Midsize SUVs

मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट में ग्राहकों के पास अब काफी विकल्प मौजूद हैं। हुंडई क्रेटा, किया सेल्टोस, मारुति सुजुकी विक्टोरिस, ग्रैंड विटारा और टोयोटा हाइराइडर जैसी गाड़ियां अलग-अलग इंजन और ट्रांसमिशन विकल्पों के साथ उपलब्ध हैं।

ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल, हाइब्रिड, मैनुअल और ऑटोमैटिक विकल्प चुन सकते हैं। यही बड़ी वजह है कि इस सेगमेंट का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

पहले किसी ग्राहक को ज्यादा जगह चाहिए होती थी तो उसे काफी महंगी एसयूवी की तरफ जाना पड़ता था। लेकिन अब मिडसाइज एसयूवी ऐसी कीमत पर उपलब्ध हैं, जहां कई ग्राहकों के लिए बजट बढ़ाना संभव हो जाता है।

कॉम्पैक्ट एसयूवी की मांग खत्म नहीं हुई है

यह कहना गलत होगा कि कॉम्पैक्ट एसयूवी की मांग खत्म हो रही है। चार मीटर से छोटी एसयूवी आज भी भारतीय बाजार का एक बड़ा हिस्सा हैं और इनकी अपनी अलग जरूरत है।

छोटे आकार की वजह से इन्हें शहर में चलाना और पार्क करना आसान होता है। इनकी शुरुआती कीमत भी मिडसाइज एसयूवी से कम रहती है। यही कारण है कि ब्रेज़ा, नेक्सन, वेन्यू, सोनेट, एक्सयूवी 3एक्सओ और स्कोडा काइलाक जैसी गाड़ियों की मांग बनी हुई है।

लेकिन जिन ग्राहकों का बजट बढ़ रहा है, वे अब कॉम्पैक्ट एसयूवी से एक सेगमेंट ऊपर जाने पर विचार कर रहे हैं।

आने वाले समय में मुकाबला और बढ़ेगा

आने वाले वर्षों में कई नई एसयूवी और क्रॉसओवर भारतीय बाजार में आने वाली हैं। इसके साथ ही हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन भी इस सेगमेंट को और मजबूत कर सकते हैं।

कंपनियां अब समझ चुकी हैं कि भारतीय ग्राहक सिर्फ छोटी और सस्ती एसयूवी नहीं चाहते। उन्हें बड़ी गाड़ी, ज्यादा जगह, आधुनिक फीचर्स और बेहतर सेफ्टी भी चाहिए। यही वजह है कि मिडसाइज एसयूवी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

सीधी सी बात है कि भारतीय कार खरीदार की सोच अब बदल रही है। पहले सवाल होता था, “सबसे कम कीमत में कौन सी एसयूवी मिलेगी?” अब कई लोग यह भी पूछ रहे हैं, “थोड़ा ज्यादा खर्च करके कितनी बेहतर और बड़ी एसयूवी मिल सकती है?”

यही सोच आने वाले समय में मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट को और मजबूत बना सकती है। हालांकि कॉम्पैक्ट एसयूवी की जरूरत खत्म नहीं होगी, लेकिन फिलहाल बाजार के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि भारतीय ग्राहक अब छोटी एसयूवी से एक कदम आगे बढ़ने लगे हैं।

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