निसान टेक्टॉन ने रेनो डस्टर को पीछे छोड़ा, लेकिन दोनों की बिक्री गिरने की असली वजह क्या है?

रेनो और निसान दोनों ने इस साल भारतीय बाजार में अपनी नई मिडसाइज SUV लॉन्च की थी। रेनो ने डस्टर को वापस लाया, जबकि निसान ने टेक्टॉन पेश की। दोनों गाड़ियाँ एक ही प्लेटफॉर्म, इंजन और फीचर्स शेयर करती हैं। लेकिन अगस्त 2026 के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। निसान टेक्टॉन ने 491 यूनिट्स बेचीं, जबकि रेनो डस्टर सिर्फ 406 यूनिट्स ही बेच पाई। यानी टेक्टॉन आगे निकल गई, लेकिन दोनों की बिक्री लगातार गिर रही है। यह चिंता की बात है, क्योंकि लॉन्च के बाद से दोनों की सेल्स में लगातार कमी आ रही है। चलिए, समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।

Nissan Tekton vs Renault Duster


बिक्री का पूरा हिसाब

पहले आंकड़ों पर नजर डालते हैं। रेनो डस्टर मार्च 2026 में लॉन्च हुई थी और अप्रैल में इसकी बिक्री 2,359 यूनिट्स तक पहुँच गई थी। लेकिन उसके बाद से हर महीने इसमें गिरावट आई। मई में 1,267, जून में 1,011, जुलाई में 512 और अगस्त में सिर्फ 406 यूनिट्स बिकीं। यानी लॉन्च के बाद से अब तक कुल 6,957 यूनिट्स बिकी हैं।

दूसरी तरफ, निसान टेक्टॉन जुलाई 2026 में लॉन्च हुई। पहले महीने में इसकी 1,670 यूनिट्स बिकीं, लेकिन अगस्त में यह आंकड़ा सिर्फ 491 रह गया। यानी एक महीने में ही 70.6 प्रतिशत की गिरावट आई। कुल मिलाकर टेक्टॉन की अब तक 2,161 यूनिट्स बिकी हैं।

महीना रेनो डस्टर निसान टेक्टॉन
मार्च 2026 1,402 –
अप्रैल 2026 2,359 –
मई 2026 1,267 –
जून 2026 1,011 –
जुलाई 2026 512 1,670
अगस्त 2026 406 491
कुल 6,957 2,161

कीमत और फीचर्स में कोई कमी नहीं

अगर कीमत और फीचर्स देखें, तो दोनों गाड़ियाँ काफी प्रतिस्पर्धी हैं। दोनों की शुरुआती कीमत 10.49 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) है। दोनों में 1.0-लीटर और 1.3-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन मिलते हैं। छोटा इंजन 100 hp और 160 Nm का टॉर्क देता है, जबकि बड़ा इंजन 163 hp और 280 Nm का टॉर्क देता है। ट्रांसमिशन में 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड वेट-क्लच DCT का ऑप्शन मिलता है। दोनों में बड़ी टचस्क्रीन, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जिंग, छह एयरबैग और कैमरा-बेस्ड फीचर्स भी मिलते हैं। यानी प्रोडक्ट के मामले में कोई बड़ी कमी नहीं दिखती।


फिर भी बिक्री क्यों गिर रही है?

इसकी कई वजहें हो सकती हैं। सबसे बड़ी वजह है डीलर नेटवर्क। रेनो और निसान दोनों का शोरूम और सर्विस नेटवर्क मारुति, हुंडई, टाटा, महिंद्रा और किया जैसी कंपनियों के मुकाबले काफी छोटा है। खासकर छोटे शहरों में इनकी पहुँच कम है। जब कोई ग्राहक 15 से 20 लाख रुपए की गाड़ी खरीदता है, तो वह सर्विस और डीलर नेटवर्क को लेकर भी सोचता है। अगर उसे लगता है कि सर्विस के लिए दूर जाना पड़ेगा, तो वह दूसरी कंपनी की तरफ जा सकता है।

दूसरी वजह है पॉवरट्रेन की सीमित पसंद। डस्टर और टेक्टॉन दोनों में फिलहाल सिर्फ टर्बो पेट्रोल इंजन मिलते हैं। जबकि आजकल ग्राहकों के पास डीजल, CNG, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसे कई ऑप्शन मौजूद हैं। कई लोग अब हाइब्रिड या CNG को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि पेट्रोल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में सिर्फ टर्बो पेट्रोल होना एक बड़ी कमी है।

तीसरी वजह है मुकाबला। 2012 में जब डस्टर पहली बार आई थी, तब इस सेगमेंट में ज्यादा गाड़ियाँ नहीं थीं। लेकिन अब हुंडई क्रेटा, किया सेल्टोस, मारुति ग्रैंड विटारा, मारुति विक्टोरिस, टोयोटा हाइराइडर, टाटा सिएरा, होंडा एलिवेट, फॉक्सवैगन टाइगुन और स्कोडा कुशाक जैसी कई गाड़ियाँ मौजूद हैं। इनमें से कई गाड़ियाँ हाइब्रिड, डीजल या CNG ऑप्शन भी देती हैं। ऐसे में डस्टर और टेक्टॉन के लिए मुकाबला काफी मुश्किल हो गया है।

चौथी वजह है ब्रांड की छवि और रीसेल वैल्यू। रेनो और निसान की बिक्री के बाद सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और रीसेल वैल्यू को लेकर ग्राहकों के मन में कुछ सवाल हो सकते हैं। जबकि मारुति, हुंडई और टाटा जैसी कंपनियों को लेकर लोगों का भरोसा ज्यादा है। इसके अलावा, दोनों गाड़ियाँ एक जैसी दिखती भी नहीं हैं, लेकिन फिर भी लोग उन्हें एक ही प्रोडक्ट का अलग-अलग वर्जन मान सकते हैं। टेक्टॉन का डिज़ाइन थोड़ा ज्यादा अपराइट है, जिससे वह अगस्त में आगे निकल गई, लेकिन सिर्फ 85 यूनिट्स का अंतर बहुत बड़ा नहीं है।


क्या हाइब्रिड डस्टर से सुधरेगा हाल?

रेनो 17 अक्टूबर को डस्टर हाइब्रिड लॉन्च करने वाली है। इसमें 1.8-लीटर पेट्रोल इंजन, 49 hp की ट्रैक्शन मोटर और 20 hp का स्टार्टर जनरेटर मिलेगा। कंपनी का दावा है कि यह शहर में 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है। हाइब्रिड वर्जन से डस्टर की बिक्री में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से डीलर नेटवर्क और ग्राहकों के भरोसे पर निर्भर करेगा। वहीं निसान और रेनो दोनों भविष्य में तीन-पंक्ति वाली SUVs लाने की योजना बना रही हैं, जिससे उन्हें अपना पोर्टफोलियो बढ़ाने का मौका मिलेगा।


Nissan Tekton vs Renault Dusterनिर्यात में अच्छा प्रदर्शन

एक दिलचस्प बात यह है कि घरेलू बाजार में बिक्री कम होने के बावजूद, दोनों गाड़ियों का निर्यात अच्छा हो रहा है। निसान ने अगस्त में 1,340 टेक्टॉन और रेनो ने अप्रैल से अगस्त के बीच 1,457 डस्टर विदेश भेजे। यानी प्रोडक्ट खराब नहीं है, लेकिन भारतीय बाजार में इसे अपनाने में लोग हिचकिचा रहे हैं।


निष्कर्ष

निसान टेक्टॉन ने अगस्त 2026 में रेनो डस्टर को पीछे छोड़ दिया, लेकिन दोनों की बिक्री लगातार गिर रही है। इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं – कमजोर डीलर नेटवर्क, सीमित पॉवरट्रेन ऑप्शन, कड़ा मुकाबला और ब्रांड को लेकर ग्राहकों का कम भरोसा। अगर रेनो और निसान को भारतीय बाजार में टिकना है, तो उन्हें अपना नेटवर्क बढ़ाना होगा, नए पॉवरट्रेन लाने होंगे और ग्राहकों का भरोसा जीतना होगा। डस्टर हाइब्रिड से कुछ उम्मीदें हैं, लेकिन असली चुनौती बिक्री को स्थिर करने की है। अगर आप इन गाड़ियों के बारे में और जानना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट पर रेनो डस्टर हाइब्रिड और निसान टेक्टॉन से जुड़े आर्टिकल्स पढ़ सकते हैं।

Exit mobile version