Petrol Car Market Share Falls (पेट्रोल कार मार्केट शेयर फॉल्स) – यह खबर उन लोगों के लिए है जो सोचते हैं कि पेट्रोल कारें हमेशा राज करेंगी। लेकिन आंकड़े कुछ और कह रहे हैं। सितंबर 2026 में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटकर 41.27 प्रतिशत रह गई, जबकि पिछले साल यह 47.18 प्रतिशत थी। यानी साल-दर-साल 5.91 प्रतिशत की गिरावट। दूसरी तरफ CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों ने मिलकर 41 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया है। अगस्त 2026 में तो इन तीनों ने पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया था। यह बदलाव भारतीय कार बाजार की दिशा बता रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े?
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, सितंबर 2025 में पेट्रोल कारों का हिस्सा 47.18 प्रतिशत था, जो सितंबर 2026 में गिरकर 41.27 प्रतिशत हो गया। डीजल लगभग स्थिर रहा – 17.76 प्रतिशत से 17.74 प्रतिशत। लेकिन CNG और LPG का हिस्सा 22.02 प्रतिशत से बढ़कर 23.11 प्रतिशत हो गया। हाइब्रिड 7.30 प्रतिशत से 9.44 प्रतिशत पर पहुंच गया, और इलेक्ट्रिक 5.74 प्रतिशत से 8.45 प्रतिशत तक पहुंच गया। यानी सबसे बड़ी छलांग इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड में देखने को मिली है। यह साफ है कि लोग अब वैकल्पिक ईंधन की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
| ईंधन प्रकार | सितंबर 2025 | सितंबर 2026 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल/एथेनॉल | 47.18% | 41.27% | -5.91% |
| डीजल | 17.76% | 17.74% | -0.02% |
| CNG/LPG | 22.02% | 23.11% | +1.09% |
| हाइब्रिड | 7.30% | 9.44% | +2.14% |
| इलेक्ट्रिक | 5.74% | 8.45% | +2.71% |
ऐसा क्यों हो रहा है?
इस बदलाव के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है पेट्रोल की बढ़ती कीमतें। लोग अब ऐसी गाड़ी चाहते हैं जिसमें रोजाना का खर्च कम हो। CNG कारें पेट्रोल से काफी सस्ती पड़ती हैं, और अब कंपनियाँ फैक्ट्री-फिटेड CNG के साथ कई मॉडल ला रही हैं। हाइब्रिड कारें भी अच्छी माइलेज देती हैं और उन्हें चार्ज करने की जरूरत नहीं होती। इलेक्ट्रिक कारों की रेंज और चार्जिंग नेटवर्क में सुधार हो रहा है, और सरकार भी उन्हें बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, कंपनियों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव किए हैं – मारुति, टाटा, हुंडई, किआ और महिंद्रा सभी अब अलग-अलग पॉवरट्रेन दे रही हैं।
कंपनियों की रणनीति
Petrol Car Market Share Falls के पीछे कंपनियों की नई रणनीति भी है। मारुति सुजुकी के पास CNG और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड दोनों हैं, और वह अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार e Vitara भी लॉन्च कर चुकी है। टाटा मोटर्स ने अपने नए आर्किटेक्चर को पेट्रोल, डीजल, CNG और इलेक्ट्रिक सभी के लिए तैयार किया है। हुंडई और किआ भी हाइब्रिड और EV पर जोर दे रही हैं। महिंद्रा की INGLO पोर्टफोलियो ने कम समय में एक लाख से ज्यादा बिक्री की है। यानी हर कंपनी ग्राहकों को यह विकल्प दे रही है कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से ईंधन चुन सकें। अब सिर्फ पेट्रोल पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।
ग्राहकों के लिए क्या मतलब?
अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह आंकड़े आपके लिए काफी मायने रखते हैं। पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटने का मतलब यह नहीं कि पेट्रोल कारें खराब हो गई हैं, बल्कि यह है कि लोग ज्यादा किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। CNG कारें शहर में चलाने के लिए बेहतरीन हैं, हाइब्रिड लंबी यात्रा के लिए अच्छी हैं, और इलेक्ट्रिक कारें अब 500 किलोमीटर तक की रेंज दे रही हैं। अगर आप रोजाना 50 किलोमीटर से ज्यादा चलाते हैं, तो CNG या हाइब्रिड आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। और अगर आप घर पर चार्जिंग की सुविधा रखते हैं, तो इलेक्ट्रिक कार सबसे सस्ती पड़ेगी।
क्या आगे भी जारी रहेगा यह ट्रेंड?
Petrol Car Market Share Falls का ट्रेंड आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है। सरकार CAFE 3 नियम लाने वाली है, जो 2027 से लागू होंगे। इनमें हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक को ज्यादा क्रेडिट मिलेगा। कंपनियाँ भी अब छोटी हाइब्रिड कारें और किफायती EV लाने की तैयारी कर रही हैं। मारुति की सीरीज हाइब्रिड, रेनो की ब्रिजर हाइब्रिड, हुंडई की कॉम्पैक्ट EV – ये सब जल्द आने वाली हैं। यानी ग्राहकों के पास अगले दो सालों में और भी विकल्प होंगे, और पेट्रोल कारों का हिस्सा और घट सकता है।
निष्कर्ष
Petrol Car Market Share Falls हो रहा है, लेकिन यह घबराने की बात नहीं है। यह बाजार के विकास का संकेत है। जब ज्यादा विकल्प होते हैं, तो ग्राहक का फायदा होता है। अगर आप पेट्रोल कार चलाते हैं, तो आपको कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पर भी विचार करें। हो सकता है कि आपकी जरूरत के लिए वही बेहतर हो। बाकी डीलर से संपर्क करके टेस्ट ड्राइव जरूर लें और अपनी ड्राइविंग के हिसाब से फैसला करें। क्योंकि असली फायदा तभी है जब गाड़ी आपकी जेब और सुविधा दोनों को ध्यान में रखकर चुनी जाए।

