स्टेलेंटिस ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने तमिलनाडु के थिरुवल्लूर स्थित अपने प्लांट का पूरा मालिकाना हासिल कर लिया है। पहले यह प्लांट हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉरपोरेशन (HMFCL) के साथ एक संयुक्त उद्यम के तहत चल रहा था, जो सीके बिड़ला ग्रुप का हिस्सा है। अब स्टेलेंटिस ने HMFCL की बाकी हिस्सेदारी खरीद ली है, जिससे यह प्लांट पूरी तरह से स्टेलेंटिस ऑटोमोबाइल्स इंडिया (SAIPL) के अधीन हो गया है। यह सौदा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के जरिए किया गया है।
अगर आप भारत में कार निर्माण और ऑटोमोबाइल सेक्टर में हो रहे बदलावों पर नजर रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। चलिए, विस्तार से जानते हैं कि इस कदम का क्या मतलब है और आगे क्या-क्या बदलने वाला है।

प्रोडक्शन में जबरदस्त उछाल
स्टेलेंटिस का प्लान अगले दो सालों में थिरुवल्लूर प्लांट का प्रोडक्शन काफी बढ़ाने का है। 2026 में यहाँ सालाना करीब 16,000 गाड़ियाँ बन रही हैं, जिन्हें 2028 तक बढ़ाकर 43,000 यूनिट्स से ज्यादा किया जाएगा। यानी प्रोडक्शन में 160 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी होगी। यह इस प्लांट के लिए एक बड़ा विस्तार होगा और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
नौकरियों में भी होगी बढ़ोतरी
फिलहाल इस प्लांट में 610 कर्मचारी सीधे तौर पर काम करते हैं। प्रोडक्शन बढ़ने के साथ इनकी संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है। कंपनी का कहना है कि प्लांट से जुड़े सप्लायर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में भी रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। यानी इसका असर सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को फायदा मिलेगा।
एक्सपोर्ट और लोकलाइजेशन
थिरुवल्लूर प्लांट सिर्फ भारतीय बाजार के लिए नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट के लिए भी अहम है। यहाँ बनी गाड़ियाँ चार महाद्वीपों के आठ बाजारों में भेजी जाती हैं। प्लांट में लोकलाइजेशन का स्तर 95 प्रतिशत से ऊपर पहुँच चुका है, यानी ज्यादातर पुर्जे भारत में ही बनाए जा रहे हैं। स्टेलेंटिस का कहना है कि तमिलनाडु का सप्लायर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इस प्लांट की सफलता में बड़ी भूमिका निभा रहा है। तमिलनाडु देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में से एक है।
कौन सी गाड़ियाँ बनती हैं?
इस प्लांट में फिलहाल सिट्रोएन के चार मॉडल बनाए जाते हैं – C3, e-C3, C3 Aircross और Basalt। यहाँ वाहनों का असेंबली काम 2021 में शुरू हुआ था, जबकि स्टेलेंटिस और सीके बिड़ला ग्रुप की साझेदारी 2017 में हुई थी। अब यह पूरा प्लांट स्टेलेंटिस के अधीन है, जिससे कंपनी को भारत में अपने ऑपरेशन्स को और तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
निवेश और भविष्य की योजनाएँ
स्टेलेंटिस ने भारत में अब तक 1 अरब यूरो से ज्यादा का निवेश किया है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, लोकलाइजेशन और क्षमता विकास शामिल है। कंपनी के भारत में CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश हजेला ने इस निवेश को करीब 11,000 करोड़ रुपए बताया है। भारत अब स्टेलेंटिस के लिए मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट का अहम केंद्र बन चुका है।
पूरा मालिकाना मिलने के बाद कंपनी को फैसले लेने में ज्यादा तेजी आएगी और ऑपरेशनल एकीकरण भी बेहतर होगा। स्टेलेंटिस ने नए प्रोडक्ट निवेश, ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, मजबूत एक्सपोर्ट और बेहतर लोकलाइजेशन पर ध्यान देने की बात कही है। हालाँकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि इस प्लांट में आगे और कौन से नए मॉडल बनाए जाएँगे।
प्रोडक्शन और रोजगार का अनुमान
| क्या | 2026 | 2028 (अनुमानित) |
|---|---|---|
| सालाना प्रोडक्शन | 16,000 यूनिट्स | 43,000+ यूनिट्स |
| सीधे कर्मचारी | 610 | 1,300+ (अनुमानित) |
| लोकलाइजेशन | 95%+ | और बढ़ेगा |
| एक्सपोर्ट बाजार | 8 (4 महाद्वीप) | और बढ़ सकते हैं |
इसका मतलब क्या है?
स्टेलेंटिस का यह कदम भारत में उसकी दीर्घकालिक योजनाओं को दिखाता है। पूरा मालिकाना मिलने से कंपनी तेजी से फैसले ले सकेगी और अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकेगी। थिरुवल्लूर प्लांट का प्रोडक्शन बढ़ने से न सिर्फ भारतीय बाजार को ज्यादा गाड़ियाँ मिलेंगी, बल्कि एक्सपोर्ट से विदेशी मुद्रा भी कमाई होगी। साथ ही, रोजगार के नए मौके पैदा होंगे और लोकल सप्लायर्स को भी फायदा होगा।
अगर आप सिट्रोएन की कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सकारात्मक है, क्योंकि कंपनी भारत में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रही है। हमने पहले Citroen e-C3X के BaaS ऑप्शन के बारे में लिखा है, जिसमें 6.89 लाख रुपए से शुरुआती कीमत थी। वह आर्टिकल भी पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
स्टेलेंटिस का थिरुवल्लूर प्लांट पर पूरा नियंत्रण भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। प्रोडक्शन बढ़ने, नौकरियों के अवसर पैदा होने और एक्सपोर्ट में इजाफा होने से यह प्लांट देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगा। आने वाले समय में स्टेलेंटिस भारत में और नए मॉडल ला सकती है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। बाकी अगर आपको इस खबर के बारे में और कोई सवाल है, तो कमेंट में पूछ सकते हैं।