Tata Motors और Amazon भारत में तैनात करेंगे 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रक, दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर भी होगा इलेक्ट्रिफाइड : Amazon का भारतीय ट्रांसपोर्ट नेटवर्क Tata Motors के 3,000 इलेक्ट्रिक ट्रक तैनात करेगा। शुरुआत त्योहारी सीजन से होगी। पहले ये गाड़ियां शहरों के अंदर माल ढुलाई में लगेंगी, उसके बाद कार्यक्रम को लंबे रूट्स तक बढ़ाया जाएगा।

Amazon इसे भारत में अपनी अब तक की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक ट्रक तैनाती और लास्ट-माइल डिलीवरी से आगे फ्रेट ऑपरेशन को इलेक्ट्रिफाइड करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम बता रही है।
हाईवे पर भी चलेंगे ट्रक
इस प्लान का हाईवे वाला हिस्सा खासा महत्वाकांक्षी है। दोनों कंपनियां NH48 पर 2,800 किमी के दिल्ली-बेंगलुरु-चेन्नई रूट को इलेक्ट्रिफाइड करना चाहती हैं, जो सात राज्यों से गुजरता है और छह बड़े ई-कॉमर्स क्षेत्रों को जोड़ता है। इस कॉरिडोर पर ट्रकों के लिए खास चार्जिंग हब बनाए जाएंगे, और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में Yahhvi शामिल है। Amazon के पास पहले से भारत में इसी प्रोवाइडर के बनाए 10 चार्जिंग यार्ड हैं।
मालिकाना और ऑपरेशन का मॉडल
कमर्शियल स्ट्रक्चर भी Amazon द्वारा सीधे फ्लीट खरीदने से अलग है। Tata Motors Amazon की ट्रांसपोर्ट जरूरतों के लिए ट्रक देगी, लेकिन लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कैरियर पार्टनर इन्हें खरीदेंगे और चलाएंगे। अहम बात यह है कि सर्विसिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल सपोर्ट भी Tata देगी, यानी यह प्रोजेक्ट किसी सीमित व्हीकल ट्रायल से कहीं आगे है।
Tata Ultra E.7
शुरुआती तैनाती में Tata Ultra E.7 मुख्य भूमिका में है। इस इलेक्ट्रिक ट्रक में इंटीग्रेटेड ई-एक्सल, CCS2 फास्ट चार्जिंग और रीजनरेटिव ब्रेकिंग है। केबिन का क्रैश टेस्ट हो चुका है और इसमें हाई-वोल्टेज सेफ्टी सिस्टम लगे हैं। Tata का कहना है कि यह गाड़ी कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और ज्यादा अपटाइम के लिए बनाई गई है—ये दो चीजें तब बहुत मायने रखती हैं जब इलेक्ट्रिक ट्रक पायलट फ्लीट से निकलकर नियमित फ्रेट काम में आते हैं।
दिल्ली की EV पॉलिसी का फायदा
दिल्ली में शुरुआत को शहर की 2026 EV पॉलिसी से एक और फायदा मिलेगा। पॉलिसी लागू होने के बाद पहले तीन महीनों में रजिस्टर होने वाले पहले 1,000 प्राइवेट मीडियम-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 साल तक दिल्ली में बिना रोक-टोक एंट्री मिलेगी। आम तौर पर फ्रेट गाड़ियों पर तय समय में “No Entry” रोक रहती है, इसलिए पात्र इलेक्ट्रिक ट्रक दिन में कहीं ज्यादा समय तक चल सकेंगे।
पहले से चल रहा है इलेक्ट्रिक फ्लीट
यह प्लान Amazon के भारतीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में पहले से मौजूद इलेक्ट्रिक फ्लीट पर आगे बढ़ता है। कंपनी के मुताबिक 500 से ज्यादा शहरों में 15,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां पहले से चल रही हैं। इसके अलावा C40 Cities के साथ Laneshift कार्यक्रम ने बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रकों का टेस्ट किया और जीरो-एमिशन ट्रकिंग के लिए एक एविडेंस-बेस्ड रोडमैप तैयार करने में योगदान दिया। हाल ही में Superev को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया गया, जो चार्जिंग एक्सेस, गाड़ियां, फाइनेंसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी को एक जगह लाता है।
2040 तक नेट जीरो का लक्ष्य
यह बड़ी ट्रक तैनाती Amazon के 2040 तक नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य के तहत भी आती है। PM E-Drive और Parivartan जैसी राष्ट्रीय पहलें भी इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों को अपनाने में सपोर्ट कर रही हैं। कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट अलग-अलग हालात में इलेक्ट्रिक ट्रकिंग का बड़ा ऑपरेशनल टेस्ट देगा—हाई-वॉल्यूम शहरी फ्रेट रूट्स से लेकर भारत के सबसे लंबे अंतर-राज्यीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर तक।