Thar और Fortuner मालिकों ने ली सड़क सुरक्षा की शपथ, जानें पूरी खबर

Thar Fortuner

Thar Fortuner: दमन में हाल ही में एक ऐसा नजारा देखने को मिला जो आमतौर पर शोरूम या ऑफ-रोड ट्रैक पर नहीं दिखता। जिला कलेक्टर की अगुवाई में Mahindra Thar और Toyota Fortuner जैसी बड़ी गाड़ियों के मालिकों ने सड़क सुरक्षा की शपथ ली। यह कदम सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ शपथ लेने से सड़कों पर कुछ बदलेगा? एक रोड टेस्टर के तौर पर मैंने सड़कों पर वाहनों का जो व्यवहार देखा है, वह कागजी शपथ से नहीं सुधरता।

Thar Fortuner: शपथ समारोह की सच्चाई और जमीनी हकीकत

Thar Fortuner exterior

दमन के इस आयोजन में सैकड़ों Thar और Fortuner मालिकों ने हाथ उठाकर वादा किया कि वे तेज रफ्तार नहीं करेंगे और यातायात नियमों का पालन करेंगे। प्रशासन का मकसद साफ है—इन बड़ी गाड़ियों को लेकर आम जनता के मन में जो डर या नकारात्मक छवि बनी है, उसे सुधारना। लेकिन सच यह है कि शपथ एक औपचारिकता बनकर रह जाती है, जब तक उसके पीछे सख्त कानून और जुर्माने की व्यवस्था न हो।

मैंने कई शहरों में देखा है कि ऐसे अभियानों का असर सिर्फ फोटो सेशन तक सीमित रह जाता है। अगले ही दिन वही गाड़ियां सिग्नल तोड़ती और बिना नंबर प्लेट के दौड़ती नजर आती हैं। असली सवाल यह उठता है कि क्या दमन प्रशासन के पास इस शपथ का पालन कराने की कोई ठोस योजना है? बिना जुर्माने और चालान के, यह पूरा कार्यक्रम महज एक PR एक्सरसाइज लगता है।

क्या सिर्फ Thar और Fortuner वाले ही खतरनाक हैं?

यहां एक बड़ी चूक दिखती है। सड़क पर तेज रफ्तार करने वाले सिर्फ बड़े SUV वाले नहीं होते। छोटी हैचबैक, सेडान और यहां तक कि दोपहिया वाहन भी अक्सर लेन बदलते समय लापरवाही करते हैं। सिर्फ Thar और Fortuner को निशाना बनाना एक तरह से भेदभाव है। इससे यह संदेश जाता है कि बाकी गाड़ियों के ड्राइवरों को शपथ लेने की जरूरत नहीं है।

मेरे अनुभव में, सड़क हादसों का कारण वाहन का साइज नहीं, बल्कि ड्राइवर की मानसिकता होती है। एक 800cc की कार भी अगर गलत तरीके से ओवरटेक करे तो जान ले सकती है। ऐसे में प्रशासन को सभी वाहन चालकों के लिए एक समान नियम और जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। वरना यह शपथ समाज में एक नई खाई पैदा करेगी।

बिना जुर्माने वाली शपथ का कोई मतलब नहीं

Thar Fortuner interior

अगर आप दमन में रहते हैं और रोज सड़क पर निकलते हैं, तो आप जानते हैं कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी कितनी कम है। ऐसे में एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने से किसी की ड्राइविंग नहीं बदलेगी। जरूरत इस बात की है कि तेज रफ्तार और लापरवाही पर भारी भरकम चालान काटा जाए। जब तक ड्राइवर को जेब पर चोट नहीं लगेगी, तब तक वह नहीं सुधरेगा।

यह भी देखने में आया है कि कई बार बड़ी गाड़ियों के मालिक कानून को चुनौती देना अपनी शान समझते हैं। ऐसे में समाजसेवी संगठनों और प्रशासन को मिलकर एक ऐसा तंत्र बनाना चाहिए जहां शपथ तोड़ने पर लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई हो। बिना दांत वाला शेर किसी को नहीं डराता।

क्या इससे बीमा और रीसेल पर असर पड़ेगा?

फिलहाल इस शपथ का कोई सीधा वित्तीय प्रभाव नहीं है। न ही बीमा कंपनियों ने ऐसी कोई घोषणा की है कि शपथ लेने वालों को कम प्रीमियम मिलेगा। हालांकि, लंबे समय में अगर सड़क हादसों में कमी आती है, तो बीमा कंपनियां इसे एक सकारात्मक संकेत मान सकती हैं। लेकिन यह तभी होगा जब डेटा यह साबित करे कि शपथ लेने वालों ने वाकई में सुधार किया है।

दूसरी ओर, Thar और Fortuner जैसी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। खरीदार आज भी इन गाड़ियों को उनके लुक और पावर के लिए खरीदता है। अगर कंपनी या प्रशासन इसे एक सामाजिक अभियान से जोड़ता है, तो शायद गाड़ी की छवि थोड़ी बेहतर हो सकती है। लेकिन यह एक धीमी प्रक्रिया है।

असली सवाल: क्या आप जिम्मेदार ड्राइवर हैं?

अगर आप Thar या Fortuner खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह शपथ आपके लिए एक आईना है। यह गाड़ी आपको ताकत और ऑफ-रोड क्षमता देती है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है। अगर आप सड़क पर रोड रेज दिखाते हैं, लेन तोड़ते हैं और दूसरों को डराते हैं, तो यह गाड़ी आपके लिए नहीं है। आपको शोरूम से लौट जाना चाहिए।

वहीं, जो लोग नियमों का पालन करते हैं, उनके लिए यह शपथ एक सम्मान की बात है। यह गाड़ी आपकी पहचान है, और आप इसे सही तरीके से पेश कर सकते हैं। लेकिन सिर्फ शपथ लेने से कुछ नहीं होगा। जब तक प्रशासन सख्ती नहीं दिखाएगा और ड्राइवर खुद नहीं सुधरेगा, तब तक सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी। यह एक शुरुआत है, मंजिल नहीं।

अंत में, यह पहल अच्छी है, लेकिन अधूरी है। दमन प्रशासन को चाहिए कि वह सभी वाहन चालकों के लिए ऐसा अभियान चलाए और तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई करे। तभी इस शपथ का असली मतलब निकलेगा।

Scroll to Top